जैसा बोओगे, वैसा काटोगे (कर्मफल का सिद्धांत)

          जीवन के इस खूबसूरत यात्रा में प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी प्रेम के पड़ाव से गुजरना पड़ता है। प्रेम करके कुछ लोग हमेशा के लिए एक हो जाते है, तो कुछ लोग चंद लम्हों में साथ रहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से बिछड़ जाते है।


       आज की कहानी भी प्यार प्रेम, धोखा और फिर दुःखद परिणाम पर आधारित है, जोकि एक सच्ची घटना है। इसे विश्व की प्रसिद्ध " मानो या ना मानो" घटनाओं में दर्ज किया गया है।


     अमेरिका में सन 1893 की घटना है। जहां हेनरी नाम का एक लड़का था, जिसकी एक सुंदर प्रेमिका थी। किंतु एक समय बाद हेनरी ने उसे छोड़ दिया। उसने प्रेमिका से अपने सभी रिश्ते–वादे तोड़ दिये। चूंकि प्रेमिका हेनरी से बहुत प्रेम करती थी इसलिए वह इस सदमे को बर्दास्त नहीं कर पायी जिसके फलस्वरूप उसने आत्महत्या कर दी।


       जब उस प्रेमिका के भाई को यह पता चला कि हेनरी के धोखा देने के कारण बहिन ने आत्महत्या की, तब भाई हेनरी से बदला लेने उसके घर पहुंचा और उसने हेनरी को गोली मार दी। लेकिन संयोग से गोली हेनरी के कान को छूते हुए सामने पेड़ पर जा लगी और हेनरी बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा। प्रेमिका के भाई को लगा की हेनरी मर चुका है। अब उसे इस अपराध की सजा मिलेगी तो उसने खुद को भी गोली से उड़ा दिया।


  कुछ समय पश्चात जब हेनरी उठा तो उसे स्वयं को भाग्यशाली पाया,क्योंकि वह जीवित था। धीरे–धीरे वह इस बात को भी भूल गया और एक बार फिर से उसकी जिंदगी अच्छी चलने लगी।


     वर्ष 1913 में हेनरी को अपने घर का निर्माण कर रहा था जिसके लिए उसे कुछ लकड़ियों की जरूरत थी।उसने उसी पेड़ को काटने की सोची, जिस पर वह गोली जा धंसी थी किंतु पेड़ बड़ा था इसलिए काटने में परेशानी आ रही थी।इसलिए उसने सोचा क्यों न इस पेड़ पर डायनामाइट लगा दूं, जिससे आसानी से पेड़ टूट जायेगा। 


अंततः उसने पेड़ पर डायनामाइट लगा दिया। फिर क्या? ब्लास्ट हुआ और वही गोली उड़ी और जाकर सीधे उसके माथे को भेद गई और उसकी मृत्यु हो गई।आखिरकार उसको 20 वर्ष बाद अपनी प्रेमिका को धोखा देने की सजा मिल गयी । उसने अपने कर्मो से जो फसल बोई थी, परिणाम के रूप में उसे अन्ततः वही फसल काटने को मिली।



          कर्म का सिद्धांत संक्षेप में बताना चाहे तो हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य के द्वारा जो भी शुभ कर्म या अशुभ कर्म किये जाते हैं उसका फल उसे अवश्य भोगना  ही पड़ता है। कर्म का यह सिद्धांत अत्यंत कठोर है। आदमी के द्वारा किए गये अच्छे कर्मों उसे जीवन में प्रगति की दिशा में ले जाते हैं तथा उसके द्वारा किए गये बुरे कर्म उसका पतन सुनिश्चित कर देते हैं।

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