पंचायती राज

      1872 ई. में लार्ड रिपन ने कुछ कानून पारित किये थे। इस कारण इन्हें भारत में पंचायतीराज का जनक कहा जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक माना जाता है। वर्ष 1882 में उन्होंने स्थानीय स्वशासन सम्बंधी प्रस्ताव दिया।  


अनुच्छेद 40 पंचायत के गठन व विकास का उल्लेख

स्थानीय स्वशासन-राज्य सूची का विषय

    ग्रामीण स्वशासन          नगरीय स्वशासन

      पंचायती राज

भारत सरकार ने फार्ड फाउण्डेशन के सहयोग से 2 अक्टुबर,1952 को देश के 55 विकास खण्डों में सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरूआत की।

इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आम जनता में राजनीतिक सहभागिता को बढ़ाना तथा राजनीतिक रूप से जागरूक करना था।


पंचायती राज व्यवस्था, ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन की प्रणाली है। जिस तरह से नगरपालिकाओं तथा उपनगरपालिकाओं के द्वारा शहरी क्षेत्रों का स्वशासन चलता है, उसी प्रकार पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का स्वशासन चलता है।


बलवन्त राय मेहता समिति, 1957- इस समिति के सामुदायिक विकास कार्यक्रम की असफलता का मुख्य कारण आम जनता में राजनीतिक सहभागिता का अभाव माना।

इसने स्थानीय स्तर पर एक तीसरी राजनैतिक सरंचना के गठन की सिफारिश करते हुए त्रिस्तरीय पंचायती राज की सिफारिश की।

1.ग्राम स्तर-ग्राम पंचायत

2.खण्ड स्तर-पंचायत समिति

3.जिला स्तर-जिला परिषद्

राजस्थान में पंचायतीराज सर्वप्रथम 2 अक्टूबर,1959 को नागौर जिले के बगदरी गांव से प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पंचायतीराज का उद्घाटन किया।


सादिक अली समिति-1964 राजस्थान सरकार द्वारा गठन

अशोक मेहता समिति-1977-78 मोरारजी देसाई सरकार

जी.वी. के. राव समिति-1985

लक्ष्मीमल (एल. एम.)सिंधवी समिति-1986 

पी.के. धुंगन समिति-1988-89 


73 संविधान संशोधन 1992

भाग-9

अनु0- 243-243 (ण)

 11 वीं अनुसूची जोडकर इसमें 29 विषयों को जोडा गया।

प्ंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने के लिए लोकसभा में 1992 में संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया जिसे दिसम्बर,1992 को दोनों सदनो से पारित किया गया


आधे राज्यों के समर्थन के बाद राष्ट्रपति के पास

राष्टपति द्वारा स्वीकृति- 20 अप्रैल,1992 

अधिनियम की सूचना जारी/लागू  24 अप्रैल,1992

पंचायती राज दिवस- 24 अप्रैल

राजस्थान सरकार ने 23 अप्रैल, 1994 को ‘‘राजस्थान पंचायती राज अधिनियम’’ लागू कर इन प्रावधानों को प्रभावी बनाया गया।

भरतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया है। 1993 में संविधान में 73 वां संविधान संसोधन 1993 के द्वारा पंचायत राज संस्था को संवैधानिक मान्यता  दी गयी है।


अनुच्छेद 243 परिभाषा

अनुच्छेद 243 (क) ग्राम सभा

अनुच्छेद 243 (ख) तीन स्तर

अनुच्छेद 243 (ग) संरचना

अनुच्छेद 243 (घ) आरक्षण

अनुच्छेद 243 (ड़) कार्यकाल

अनुच्छेद 243 (च) योग्यताएं

अनुच्छेद 243 (छ) शक्तियां 

अनुच्छेद 243 (ज) वित्तीय शक्तियां

अनुच्छेद 243 (झ) राज्य वित्त आयोग

अनुच्छेद 243 (ञ) लेखा संपरीक्षा

अनुच्छेद 243 (ट) राज्य निर्वाचन आयोग

अनुच्छेद 243 (ठ) केन्द्रशासित में इसका लागू न होना

अनुच्छेद 243 (ड) कुछ क्षेत्रों में इसका लागू न होना

अनुच्छेद 243 (ढ) पूर्व प्रचलित विधियों का बने रहना

अनुच्छेद 243 (ण) न्यायालय के हस्तक्षेप का निषेध


बैठक- दो बैठकों में 6 माह से अधिक अन्तराल नहीं

गणपूर्ति- 1/10 सदस्य

अध्यक्षता- सरपंच या उपसरपंच-ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित व्यक्ति।

कार्य- विकास योजनाओं का निर्माण व मूल्याकंन करना।


तीन स्तर- अनुच्छेद 243 (ख)

ग्राम स्तर- ग्राम पंचायत 

खण्ड स्तर- पंचायत समिति 

जिला स्तर- जिला परिषद्

जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम होगी वहां मध्यवर्ती स्तर नहीं होगा।


संरचना अनु. 243 (ग) पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण समान जनसंख्या

अध्यक्ष  ग्राम पंचायत - विधानसभा द्वारा निर्धारित 

   पंचायत समिति-अप्रत्यक्ष

   जिला परिषद्- अप्रत्यक्ष

उपाध्यक्ष- अप्रत्यक्ष


आरक्षण- अनुच्छेद 243 (घ)

अनु0 जाति, अनु0 जनजाति महिलाओं का आरक्षण

OBC - विधानमण्डल द्वारा निर्धारण 

SC/ST को आरक्षण उस राज्य के जनसंख्या के अनुपात में।

महिलाओं को कम से कम 33% आरक्षण

चक्रानुक्रम पद्धति से सीटों का निर्धारण ।


कार्यकाल- अनुच्छेद 243 (ड़) - 5 वर्ष

-आकस्मिक पद रिक्ति की दशा में 6 माह की अवधि में निर्वाचन होना आवश्यक है तथा नवनिर्वाचित सदस्य शेष कार्यकाल के लिए पद पर रहेगा।

- अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को 1/3 सदस्यों के प्रस्ताव से एवं यदि 3/4 सदस्यों के बहुमत से पारित हो जाये तो अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को हटना पड़ता है।


योग्यताएं- अनुच्छेद 243 (च)

1.भारत का नागरिक हो।

2. 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।

3. वे समस्त योग्यताएं जो विधानमण्डल तय करें।


शक्तियां अनुच्छेद 243 (छ) 

पंचायतों में 11 वीं अनुसूची में दिये गये 29 विषयों में से उन विषयों पर विधि निर्माण तथा निर्णय लेने की शक्ति प्रदान होना जो विधानमण्डल विधि द्वार उन्हें सौंपे।

वित्तीय शक्तियां/करारोपण अनुच्छेद 243 (ज)

पंचायतों को 11 वीं अनुसूची में दिये गये करों में से वे कर लगाने तथा उन्हें एकत्र करने की शक्ति प्राप्त होगी, जो राज्य विधि द्वारा विधानमण्डल को सौंपे।


राज्य वित्त आयोग-अनुच्छेद 243 (झ)

पंचायतों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की सिफारिश हेतु राज्यपाल प्रति 5 वर्ष से एक राज्य वित्त आयोग का गठन करेगा।


लेखा संपरीक्षा-अनुच्छेद 243 (ञ)

राज्य विधानमण्डल विधि द्वारा पंचायतों के लेखा संपरीक्षा सम्बन्धी प्रावधान कर सकेगा।


राज्य निर्वाचन आयोग-अनुच्छेद 243 (ड)

पंचायतों के निर्वाचन का संचालन निर्देशन तथा परिवेषण करने हेतु प्रत्येक राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग होगा।

एक सदस्य-राज्य निर्वाचन आयोग

राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति- राज्यपाल द्वारा

कार्यकाल- 5 वर्ष / 65 वर्ष की आयु 

त्यागपत्र-राज्यपाल को

पद से हटाना- राष्टपति द्वारा संसद के समावेदन पर

कुछ क्षेत्रों में लागू नहीं- अनुच्छेद 243 (ड)

नागपुर, मणिपुर, मिजोरम (मणिपुर के पहाडी क्षेत्रों मे),  पं. बंगाल के दार्जिलिंग जिले में,  

अनुसूचित एवं जनजातिया क्षेत्रों में


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