इम्तिहान का दौर

लौट आयेगी खुशियाँ, अभी गमों का जो शोर है l
निराश न हो, मेरे दोस्त, अभी इम्तिहान का जो दौर है ll

इन्हीं इम्तिहानों में हवा का बहुत शोर है,
लेकिन दोस्तो आप भी तो खुद में महापौर है l
रिमझिम बारिश का मौसम भी आया है,
कहीं धूप तो कहीं बारिश की बौछार संग लाया है,
जरा संभल कर रहना-ए-दोस्त, 
क्योंकि इम्तिहान का वक्त जो आया हैll






एक तरफ कोरोना का कहर है, तो वहीं दूसरी तरफ अम्फान तूफान चल आया है,
बरसाती मौसम में अब कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन का साया है,
जरा संभल कर रहना-ए-दोस्त, इम्तिहान का दौर जो आया है ll

जून की तपतपाती गर्मी में,
मानसून आने से राहत की तो कुछ खबर है,
लेकिन संभल कर रहना-ए-दोस्त,
ये मौसम बड़ा बेखबर है ll

बदलते मौसम के साथ सफर थोड़ा मुश्किल सा है l
बसंत में खिलखिलाते फूल की पुकार भी कुछ अलग है,
लौट आएगी वो चांदनी की रात, चिड़ियों की चहचहाहट,
अभी मौसम के साथ बदल 
या बदलते मौसम के साथ जीना सीख लें,
बस अभी संभल कर रहना-ए-दोस्त,
 इम्तिहान का दौर जो आया है ll

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