प्रकृति के भी अलग-अलग नजारे होते हैं,
कुछ खूबसूरत तो कुछ बहुत ही प्यारे होते हैं,
ले समेटती है ये पूरी तन्हाई अपने भीतर,
उसे सुख-दु:ख का सामंजस्य करना खूब आता हैl
खुद का अस्तित्व बचाए रखना खूब आता हैll
उसी के अस्तित्व पर ये दुनिया निर्भर है,
उसके ना होने पर दुनिया अपने आप ही खत्म हो जाएगी
अपने आप को बचाए रखने के लिए ही तो उसके,
अलग अलग नजारे होते हैं II
मानव के अत्यधिक भोग विलासिता वाले जीवन ने प्रकृति पर खूब अत्याचार किया हैl
कहीं जंगलों को काट कर बड़े-बड़े शहर बनाए गए तो कहीं फैक्ट्रियों के निर्माण ने प्रकृति पर खूब वार किया है, लेकिन प्रकृति को भी अपनी भाषा में जवाब देना आता हैl
कभी केदारनाथ आपदा तो कभी ग्लोबल वार्मिंग द्वारा अपना रोष प्रकट करती है,
मानव को चेतावनी देती है कि अभी भी संभल!
प्रकृति को अपने अंदर हर चीज को समेटना खूब आता है
फूलों की घाटी, बेदनी-दयारा बुग्यालों में अलग ही सुकून आता है
हिमालय की चोटियों की कुछ अलग ही विशेषता है
वहां से निकलने वाली नदियों से ही समुद्र का अस्तित्व होना नजर आता है l
संजीवनी बूटी से लेकर अश्वगंधा, शतावरी, कीड़ाजड़ी तक असंख्य औषधियां, फल-फूल आदि का भंडार इसमें समाता है,
समस्त जीवोंं को इसका सहारा खूब पसंद आता है,
इसीलिए प्रकृति के अलग-अलग नजारे होते हैं,
कुछ खूबसूरत तो कुछ बहुत प्यारे होते है ll
कुछ खूबसूरत तो कुछ बहुत प्यारे होते है ll


11 टिप्पणियाँ
Bahut sunadr Ashish kala ji
जवाब देंहटाएंThank you Ji
हटाएंBhaut khoob
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएंThank you तिवारी जी
हटाएंप्रकृति की छवि का वर्णन बहुत रमणीय 👌
जवाब देंहटाएंThank you Mam
हटाएंAwesome
जवाब देंहटाएंThank you
हटाएंBadiya bhai lage raho
जवाब देंहटाएंNice bhula
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