एक बूढ़े आदमी की अपने एकलौते बेटे से बहस हो गयी । उसने कई बार माफी मांगी, लेकिन उस नौजवान ने उसकी एक न सुनी। पिता ने हार नहीं मानी क्योंकि वह अपने बेटे से बहुत प्यार करता था, लेकिन बेटे ने उसे माफ नहीं किया क्योंकि वह अपने घमंड में चूर था ।
इस दौरान उसके बेटे का भी एक बेटा हो गया था, जो अब एक नवयुवक बन चुका था। उसके बेटे ने अपने दादा के बारे में जानना चाहा, लेकिन वह हमेशा कुछ न कुछ बहाना बनाकर इस बारे में बात करने से मना कर देता ।
एक दिन उन दोनों में बहुत बहस छिड़ गयी, जिसके बाद उसका बेटा भी घर छोड़कर चला जाता है, जैसे कई साल पहले वह आदमी चला गया था। वह बहुत दुःखी हुआ। इस बार उसमें कोई घमंड नहीं था लेकिन वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहा था। उसे लगा कि उसने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है। जिंदगी में पहली बार उसने भगवान की प्रार्थना की ओर रुख किया । उसे अहसास हुआ कि बीते समय में उसने भी अपने पिता का दिल दुःखा कर बहुत गलत किया था, जिसने जिंदगीभर उसे बेहतर से बेहतर बनाने में अपना शत प्रतिशत दिया ।
इन दुःखद ख्यालों के साथ वह सोफे पर ही सो गया । अगले सुबह जब उसकी नींद खुली तो उसने देखा कि वह आराम से पलंग पर सो रहा है और बेटा उसके सामने खड़ा है । उसे अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । बाप-बेटा एक दूसरे से गले लिपटकर खूब रोये ।

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